सूरह अल-कहफ़
أَفَحَسِبَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَن يَتَّخِذُوا۟ عِبَادِى مِن دُونِىٓ أَوْلِيَآءَ ۚ إِنَّآ أَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَـٰفِرِينَ نُزُلًا
Afaḥasibal-lażīna kafarū ay yattakhiżū ‘ibādī min dūnī auliyā'(a), innā a‘tadnā jahannama lil-kāfirīna nuzulā(n).
तो क्या इनकार करनेवाले इस ख़याल में हैं कि मुझसे हटकर मेरे बन्दों को अपना हिमायती बना लें? हमने ऐसे इनकार करनेवालों के आतिथ्य-सत्कार के लिए जहन्नम तैयार कर रखा है
📝 टिप्पणी
457) सूरह आले इमरान/3: 28 की पाद-टिप्पणी (फुटनोट) देखें।
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