सूरह अल-कहफ़

حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ ٱلشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَّمْ نَجْعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتْرًا

Ḥattā iżā balaga maṭli‘asy-syamsi wajadahā taṭlu‘u ‘alā qaumil lam naj‘al lahum min dūnihā sitrā(n).

यहाँ तक कि जब वह सूर्योदय स्थल पर जा पहुँचा तो उसने उसे ऐसे लोगों पर उदित होते पाया जिनके लिए हमने सूर्य के मुक़ाबले में कोई ओट नहीं रखी थी

📝 टिप्पणी
454) कुछ मुफ़स्सिरों के अनुसार, ज़ुलक़रनैन को जो समुदाय मिला था, वह एक निर्धन और अभावग्रस्त कौम थी।

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