सूरह अल-कहफ़

وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ ٱسْجُدُوا۟ لِـَٔادَمَ فَسَجَدُوٓا۟ إِلَّآ إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ ٱلْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِۦٓ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُۥ وَذُرِّيَّتَهُۥٓ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِى وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّۢ ۚ بِئْسَ لِلظَّـٰلِمِينَ بَدَلًا

Wa iż qulnā lil-malā'ikatisjudū li'ādama fa sajadū illā iblīs(a), kāna minal-jinni fa fasaqa ‘an amri rabbih(ī), afa tattakhiżūnahū wa żurriyyatahū auliyā'a min dūnī wa hum lakum ‘aduww(un), bi'sa liẓ-ẓālimīna badalā(n).

याद करो जब हमने फ़रिश्तों से कहा, "आदम को सजदा करो।" तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया। वह जिन्नों में से था। तो उसने अपने रब के आदेश का उल्लंघन किया। अब क्या तुम मुझसे इतर उसे और उसकी सन्तान को संरक्षक मित्र बनाते हो? हालाँकि वे तुम्हारे शत्रु है। क्या ही बुरा विकल्प है, जो ज़ालिमों के हाथ आया!

📝 टिप्पणी
449) सूरह आलि इमरान/3: 28 का फुटनोट (टिप्पणी) देखें।

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