सूरह अल-कहफ़

قَالُوا۟ يَـٰذَا ٱلْقَرْنَيْنِ إِنَّ يَأْجُوجَ وَمَأْجُوجَ مُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ فَهَلْ نَجْعَلُ لَكَ خَرْجًا عَلَىٰٓ أَن تَجْعَلَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ سَدًّا

Qālū yā żal-qarnaini inna ya'jūja wa ma'jūja mufsidūna fil-arḍi fahal naj‘alu laka kharjan ‘alā an taj‘alā bainanā wa bainahum saddā(n).

उन्होंने कहा, "ऐ ज़ुलक़रनैन! याजूज और माजूज इस भूभाग में उत्पात मचाते हैं। क्या हम तुम्हें कोई कर इस बात काम के लिए दें कि तुम हमारे और उनके बीच एक अवरोध निर्मित कर दो?"

📝 टिप्पणी
456) याजूज और माजूज दो ऐसी कौमें हैं जो धरती पर उपद्रव और तबाही मचाती हैं।

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