सूरह अल-कहफ़

وَرَبَطْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ إِذْ قَامُوا۟ فَقَالُوا۟ رَبُّنَا رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَن نَّدْعُوَا۟ مِن دُونِهِۦٓ إِلَـٰهًا ۖ لَّقَدْ قُلْنَآ إِذًا شَطَطًا

Wa rabaṭnā ‘alā qulūbihim iż qāmū fa qālū rabbunā rabbus-samāwāti wal-arḍi lan nad‘uwa min dūnihī ilāhal laqad qulnā iżan syaṭaṭā(n).

और हमने उनके दिलों को सुदृढ़ कर दिया। जब वे उठे तो उन्होंने कहा, "हमारा रब तो वही है जो आकाशों और धरती का रब है। हम उससे इतर किसी अन्य पूज्य को कदापि न पुकारेंगे। यदि हमने ऐसा किया तब तो हमारी बात हक़ से बहुत हटी हुई होगी

📝 टिप्पणी
446) खड़े होना और अत्याचारी व अहंकारी राजा दिक़्यानूस का सामना करना।

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