सूरह अल-कहफ़

وَلَمْ تَكُن لَّهُۥ فِئَةٌ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا

Wa lam takul lahū fi'atuy yanṣurūnahū min dūnillāhi wa mā kāna muntaṣirā(n).

उसका कोई जत्था न हुआ जो उसके और अल्लाह के बीच पड़कर उसकी सहायता करता और न उसे स्वयं बदला लेने की सामर्थ्य प्राप्त थी

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