सूरह अल-कहफ़

فَعَسَىٰ رَبِّىٓ أَن يُؤْتِيَنِ خَيْرًا مِّن جَنَّتِكَ وَيُرْسِلَ عَلَيْهَا حُسْبَانًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَتُصْبِحَ صَعِيدًا زَلَقًا

Fa ‘asā rabbī ay yu'tiyani khairam min jannatika wa yursila ‘alaihā ḥusbānam minas-samā'i fa tuṣbiḥa ṣa‘īdan zalaqā(n).

तो आशा है कि मेरा रब मुझे तेरे बाग़ से अच्छा प्रदान करें और तेरे इस बाग़ पर आकाश से कोई क़ुर्क़ी (आपदा) भेज दे। फिर वह साफ़ मैदान होकर रह जाए

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