सूरह अल-कहफ़
ٱلْمَالُ وَٱلْبَنُونَ زِينَةُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَٱلْبَـٰقِيَـٰتُ ٱلصَّـٰلِحَـٰتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا
Al-mālu wal-banūna zīnatul-ḥayātid-dun-yā, wal-bāqiyātuṣ-ṣāliḥātu khairun ‘inda rabbika ṡawābaw wa khairun amalā(n).
माल और बेटे तो केवल सांसारिक जीवन की शोभा है, जबकि बाक़ी रहनेवाली नेकियाँ ही तुम्हारे रब के यहाँ परिणाम की दृष्टि से भी उत्तम है और आशा की दृष्टि से भी वही उत्तम है
📝 टिप्पणी
448) उन चिरस्थायी नेक कर्मों के उदाहरणों में, जिनका पुण्य हमेशा रहने वाला है, इस्लाम के स्तंभों (रुकन) का सही ढंग से पालन करना और तस्बीह (अल्लाह की पवित्रता का वर्णन), तहमीद (अल्लाह की प्रशंसा) और अन्य ज़िक्र (स्मरण) पढ़ना शामिल है।