सूरह अल-कहफ़
ثُمَّ بَعَثْنَـٰهُمْ لِنَعْلَمَ أَىُّ ٱلْحِزْبَيْنِ أَحْصَىٰ لِمَا لَبِثُوٓا۟ أَمَدًا
Ṡumma ba‘aṡnāhum lina‘lama ayyul-ḥizbaini aḥṣā limā labiṡū amadā(n).
फिर हमने उन्हें भेजा, ताकि मालूम करें कि दोनों गिरोहों में से किसने याद रखा है कि कितनी अवधि तक वे रहे
📝 टिप्पणी
445) वे दो समूह स्वयं वे नौजवान ही थे जो आपस में इस बात पर विवाद कर रहे थे कि वे गुफ़ा में कितनी अवधि तक रहे।
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