सूरह अल-कहफ़
فَوَجَدَا عَبْدًا مِّنْ عِبَادِنَآ ءَاتَيْنَـٰهُ رَحْمَةً مِّنْ عِندِنَا وَعَلَّمْنَـٰهُ مِن لَّدُنَّا عِلْمًا
Fa wajadā ‘abdam min ‘ibādinā ātaināhu raḥmatam min ‘indinā wa ‘allamnāhu mil ladunnā ‘ilmā(n).
फिर उन्होंने हमारे बन्दों में से एक बन्दे को पाया, जिसे हमने अपने पास से दयालुता प्रदान की थी और जिसे अपने पास से ज्ञान प्रदान किया था
📝 टिप्पणी
452) मुफ़स्सिरों के अनुसार, हदीस के आधार पर, यहाँ 'बंदे' से तात्पर्य हज़रत ख़िज़्र (अलयहिस्सलाम) से है, और 'रहमत' (कृपा) से अभिप्राय वह्य (प्रकाशना) और नुबुव्वत (पैगंबरी) है। वहीं 'इल्म' (ज्ञान) से तात्पर्य ग़ैब (परोक्ष) के ज्ञान से है, जैसा कि अगली आयतों में स्पष्ट किया जाएगा।