सूरह अल-कहफ़

وَكَيْفَ تَصْبِرُ عَلَىٰ مَا لَمْ تُحِطْ بِهِۦ خُبْرًا

Wa kaifa taṣbiru ‘alā mā lam tuḥiṭ bihī khubrā(n).

और जो चीज़ तुम्हारे ज्ञान-परिधि से बाहर हो, उस पर तुम धैर्य कैसे रख सकते हो?"

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