सूरह अल-कहफ़

قَالَ هَـٰذَا فِرَاقُ بَيْنِى وَبَيْنِكَ ۚ سَأُنَبِّئُكَ بِتَأْوِيلِ مَا لَمْ تَسْتَطِع عَّلَيْهِ صَبْرًا

Qāla hāżā firāqu bainī wa bainik(a), sa'unabbi'uka bita'wīli mā lam tastaṭī‘ ‘alaihi ṣabrā(n).

उसने कहा, "यह मेरे और तुम्हारे बीच जुदाई का अवसर है। अब मैं तुमको उसकी वास्तविकता बताए दे रहा हूँ, जिसपर तुम धैर्य से काम न ले सके।"

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