सूरह अल-कहफ़

وَإِذِ ٱعْتَزَلْتُمُوهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ إِلَّا ٱللَّهَ فَأْوُۥٓا۟ إِلَى ٱلْكَهْفِ يَنشُرْ لَكُمْ رَبُّكُم مِّن رَّحْمَتِهِۦ وَيُهَيِّئْ لَكُم مِّنْ أَمْرِكُم مِّرْفَقًا

Wa iżi‘tazaltumūhum wa mā ya‘budūna illallāha fa'wū ilal-kahfi yansyur lakum rabbukum mir raḥmatihī wa yuhayyi' lakum min amrikum mirfaqā(n).

और जबकि इनसे तुम अलग हो गए हो और उनसे भी जिनको अल्लाह के सिवा ये पूजते है, तो गुफा में चलकर शरण लो। तुम्हारा रब तुम्हारे लिए अपनी दयालुता का दामन फैला देगा और तुम्हारे लिए तुम्हारे अपने काम से सम्बन्ध में सुगमता का उपकरण उपलब्ध कराएगा।"

📝 टिप्पणी
447) यह बातचीत उनके अपने बीच हुई थी, जो अल्लाह सुब्हानहू व तआला की ओर से इल्हाम (प्रेरणा) के कारण उत्पन्न हुई थी।

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